राहें कुछ ऐसी उलझीं
के वो अजनबी अपनों से अपना लगने लगा
ना मिली हो मोहब्बत जिसको उम्र भर
आज एक अनदेखे का साथ मोहब्बत सा लगने लगा.
अपनेपन से, प्यार से,
लेकिन अब खौफ सा लगता है
उस अजनबी को खोने का अहसास भी
हर पल उसके करीब लाता है.
इन नजदीकियों से दूर जाना ही मजबूरी है मेरी
शायद तन्हाई में जीना ही तकदीर है मेरी
जाना ही तो था तुझे एक ना एक दिन
एक दिन पहले ही मैं कर गया इस मुश्किल को कम तेरी.
ये माना के ये खता मेरी है
पर नफरत ना करना मुझसे ऐ दिलनशीं
भुला ही देना मुझे अपनी ज़िन्दगी से
मुझे नफरत में भी याद करने की सज़ा खुद को ना देना ऐ हसीं.
तुझको नहीं दे सकता मैं सज़ा
ना दे सकता हूँ इलज़ाम मुझे छोड़ जाने का
ये खता मैं लेता हूँ अपने ही सर पे
मेरे ही दामन पे लगे दाग बेवफाई का, तुझे छोड़ जाने का.
भुला के मुझे जी ले तू अपनी ज़िन्दगी
खुशियों से भर ले दूर करले मुझसे अपनी ज़िन्दगी
बस नफरत ना करना तू मुझसे
बस प्यार ही प्यार से भरी हो तेरी ज़िन्दगी.
तेरे ही लिए दुआ करता है आज भी ये दीवाना
तेरे ही ख्यालों में जीता है आज भी ये दीवाना
तेरे दिल से दूर है भले ही
तेरी ही आग में जलाता रहेगा अपना दिल ये दीवाना.
Wednesday, January 6, 2010
Monday, December 14, 2009
Gham Ka Rishta
दर्द छिपाए सीने में
हम तन्हा जिया करते थे
खुद के ग़म को दुनिया से अलग मानके
हम आंसूं बहाया करते थे.
जबसे तेरे दिल को जाना है हमने
ये जाना कि तेरा भी ग़म कुछ मेरे ही जैसा है
दुनिया से अलग सिर्फ मैं ही नहीं
कोई और भी मेरे जैसा है.
अजीब सा तेरा मेरा ये रिश्ता है
जोड़ता है हमको ग़म एक दुसरे का
ग़म का ये रिश्ता कैसे इतनी ख़ुशी दे जाता है
जीने की हमारी वजह है ग़म एक दुसरे का.
ना नाम है कोई, ना कोई पहचान है
इस रिश्ते में ना कोई उम्मीद बस जज्बातों का उफान है
फिर भी ये ग़म का रिश्ता ज़िन्दगी की सबसे ख़ूबसूरत अमानत है
ग़म का ही सही, ये रिश्ता ही ही अब तेरा मेरा ना पूरा हो सकने वाला अरमान है.
हम तन्हा जिया करते थे
खुद के ग़म को दुनिया से अलग मानके
हम आंसूं बहाया करते थे.
जबसे तेरे दिल को जाना है हमने
ये जाना कि तेरा भी ग़म कुछ मेरे ही जैसा है
दुनिया से अलग सिर्फ मैं ही नहीं
कोई और भी मेरे जैसा है.
अजीब सा तेरा मेरा ये रिश्ता है
जोड़ता है हमको ग़म एक दुसरे का
ग़म का ये रिश्ता कैसे इतनी ख़ुशी दे जाता है
जीने की हमारी वजह है ग़म एक दुसरे का.
ना नाम है कोई, ना कोई पहचान है
इस रिश्ते में ना कोई उम्मीद बस जज्बातों का उफान है
फिर भी ये ग़म का रिश्ता ज़िन्दगी की सबसे ख़ूबसूरत अमानत है
ग़म का ही सही, ये रिश्ता ही ही अब तेरा मेरा ना पूरा हो सकने वाला अरमान है.
Friday, December 11, 2009
Khud Se Na Inkaar Kar
दिल में छुपाके प्यार मेरा
खुद से भी तू इनकार करता है
डरता है तू मेरे प्यार से
या खुद ही खुद से डरता है?
कर ले इकरार तू
दुनिया के बन्धनों का क्या ख्याल करता है
मेरे लिए ना सही अपने लिए ही इज़हार कर
अपनी ख़ुशी से भला क्यूँ इनकार करता है?
दूंगा हर कदम हर मोड़ पे मैं साथ तेरा
क्यूँ तू खुद को महसूस अकेला करता है
दुनिया में जितना है प्यार नहीं
कहीं ज्यादा उससे तुझको प्यार ये दीवाना करता है
दूर रखके खुद से खुशियाँ
दर्द को सीने से क्यूँ लगाता है
खुशियों को देकर एक मौका देख
दर्द से कहीं ज्यादा खुशियों से तेरा नाता है
कर ले खुद पर भी यकीन एक बार तू
मोहब्बत को एक मौका देने में क्या जाता है
यकीन तेरा टूटने ना दूंगा मैं
देख ये दीवाना तेरी दुनिया में कैसी बहार लाता है.
Sunday, December 6, 2009
Ajnabi
तू मेरा कोई भी नहीं है
उम्मीद भी तुझसे कोई नहीं
कल तक ही तो तू अजनबी था
आज भी तू हमसफ़र नहीं.
फिर क्यूँ आँखें बिछा रखी हैं
क्यूँ है इस बेसब्री से तेरा इंतज़ार
नहीं मैं तुझसे प्यार नहीं करता
फिर क्यूँ है तेरी देरी से ये दिल बेकरार?
क्या सचमुच तू मेरा कोई नहीं है
क्या सचमुच ही तू अजनबी है?
ये क्या हो रहा है मुझको ऐ दिल
की तू पूछता है की क्यूँ तू मेरा हमसफ़र नहीं है?
ये ख्वाब भी टूटेगा
फिर एक बार तू गुम होगा आँखों से मेरी
दिल फिर भी ढूँढेगा तुझको
आखिर क्यूँ, की जब जानता है हमेशा की तू आया ही था ज़िन्दगी से जाने को मेरी?
उम्मीद भी तुझसे कोई नहीं
कल तक ही तो तू अजनबी था
आज भी तू हमसफ़र नहीं.
फिर क्यूँ आँखें बिछा रखी हैं
क्यूँ है इस बेसब्री से तेरा इंतज़ार
नहीं मैं तुझसे प्यार नहीं करता
फिर क्यूँ है तेरी देरी से ये दिल बेकरार?
क्या सचमुच तू मेरा कोई नहीं है
क्या सचमुच ही तू अजनबी है?
ये क्या हो रहा है मुझको ऐ दिल
की तू पूछता है की क्यूँ तू मेरा हमसफ़र नहीं है?
ये ख्वाब भी टूटेगा
फिर एक बार तू गुम होगा आँखों से मेरी
दिल फिर भी ढूँढेगा तुझको
आखिर क्यूँ, की जब जानता है हमेशा की तू आया ही था ज़िन्दगी से जाने को मेरी?
Zinda
दर्द अब बर्दाश्त से बाहर है
ना ही बची अब दिलो दिमाग में ताकत है
एक आसरा तेरा था मौत, तू मिलेगी मुझसे
तुझे भी आज छीन लिया उस ज़ालिम ने मुझसे.
एक वादे ने बाँधा कुछ ऐसे बंधन में मुझको
रोज़ ही मरता रहूँ मैं लेकिन
मर मर के ही जीना पड़ेगा
दिल बहाता रहे खून के आंसूं, पीना पड़ेगा.
तेरा नहीं है कसूर मैं जानता हूँ
तू बस मुझे जिंदा देखना चाहता है
पर ये ना समझा तू की इस ज़िन्दगी की लाश उठाने की अब ताकत नहीं है मुझमें
और एक तू है, की मेरा सहारा बनने की हिम्मत नहीं है तुझमें.
नहीं निभा सकता है तू साथ मेरा
लेकिन ये चाहता है की तेरे बिना मैं निभाऊं ज़िन्दगी का साथ
शर्त ये तेरी जिंदा तो रख जाएगी मुझे
फिर तुझे क्या की ये ज़िन्दगी कितना सताएगी मुझे.
वादा किया है तुझसे तो मैं निभाऊंगा
घुटते हुए ही गर देखना चाहती है तू मुझको तो चल दिखाऊंगा
लोग प्यार की खातिर मर मिटते हैं
मैं तुझे जिंदा रहके बताऊंगा.
ना ही बची अब दिलो दिमाग में ताकत है
एक आसरा तेरा था मौत, तू मिलेगी मुझसे
तुझे भी आज छीन लिया उस ज़ालिम ने मुझसे.
एक वादे ने बाँधा कुछ ऐसे बंधन में मुझको
रोज़ ही मरता रहूँ मैं लेकिन
मर मर के ही जीना पड़ेगा
दिल बहाता रहे खून के आंसूं, पीना पड़ेगा.
तेरा नहीं है कसूर मैं जानता हूँ
तू बस मुझे जिंदा देखना चाहता है
पर ये ना समझा तू की इस ज़िन्दगी की लाश उठाने की अब ताकत नहीं है मुझमें
और एक तू है, की मेरा सहारा बनने की हिम्मत नहीं है तुझमें.
नहीं निभा सकता है तू साथ मेरा
लेकिन ये चाहता है की तेरे बिना मैं निभाऊं ज़िन्दगी का साथ
शर्त ये तेरी जिंदा तो रख जाएगी मुझे
फिर तुझे क्या की ये ज़िन्दगी कितना सताएगी मुझे.
वादा किया है तुझसे तो मैं निभाऊंगा
घुटते हुए ही गर देखना चाहती है तू मुझको तो चल दिखाऊंगा
लोग प्यार की खातिर मर मिटते हैं
मैं तुझे जिंदा रहके बताऊंगा.
Saturday, December 5, 2009
Ek Naye Dost Ke Naam
बातें करके उससे दिल बहलने सा लगता है
नाउम्मीदी में भी क्यूँ एक दिया जलता सा लगता है
मैं जानता हूँ की ये भी सपना टूट जायेगा मगर
क्यूँ ये अजनबी एक दोस्त सा नज़र आता है.
दोस्ती से प्यार से रिश्तों से ममता से
हो गयी है नफरत मुझको
नहीं चाहता नए धागों में बंधना फिर भी
क्यों ये अजनबी दोस्त प्यारा सा नज़र आता है.
सपनों को टूटते इतना देखा है की अब
सपने देखने से भी डर लगता है
रोका है खुद को इतना फिर भी
क्यूँ इस नए दोस्त में एक सुन्दर सपना सा नज़र आता है.
ए दोस्त शुक्रिया तेरी दोस्ती का
तू नहीं जानता के कितने इसके मायने हैं
लेकिन दिखा ना मुझको फिर से खूबसूरत ज़िन्दगी के ख्वाब
मुझे ये हसीं सपना बिखरता सा नज़र आता है.
अबके बिखरा तो फिर जुड़ ना पाऊंगा
करता है तू ना जाने का वादा मैं जानता हूँ लेकिन
तुझसे ज्यादा मुझे मेरी बदकिस्मती पे भरोसा है
तू मुझे मेरी ज़िन्दगी का आखरी सौगात सा नज़र आता है.
नाउम्मीदी में भी क्यूँ एक दिया जलता सा लगता है
मैं जानता हूँ की ये भी सपना टूट जायेगा मगर
क्यूँ ये अजनबी एक दोस्त सा नज़र आता है.
दोस्ती से प्यार से रिश्तों से ममता से
हो गयी है नफरत मुझको
नहीं चाहता नए धागों में बंधना फिर भी
क्यों ये अजनबी दोस्त प्यारा सा नज़र आता है.
सपनों को टूटते इतना देखा है की अब
सपने देखने से भी डर लगता है
रोका है खुद को इतना फिर भी
क्यूँ इस नए दोस्त में एक सुन्दर सपना सा नज़र आता है.
ए दोस्त शुक्रिया तेरी दोस्ती का
तू नहीं जानता के कितने इसके मायने हैं
लेकिन दिखा ना मुझको फिर से खूबसूरत ज़िन्दगी के ख्वाब
मुझे ये हसीं सपना बिखरता सा नज़र आता है.
अबके बिखरा तो फिर जुड़ ना पाऊंगा
करता है तू ना जाने का वादा मैं जानता हूँ लेकिन
तुझसे ज्यादा मुझे मेरी बदकिस्मती पे भरोसा है
तू मुझे मेरी ज़िन्दगी का आखरी सौगात सा नज़र आता है.
Aa Kar Le Dosti
आ करले दोस्ती मुझसे
लगा ले मुझको गले
मौत, ज़िन्दगी में आजा मेरी
चल ज़िन्दगी से कहीं दूर चलें.
ले ले ज़िन्दगी मेरी
वो होगी मेरे दोस्ती कि सौगात
खुशियों कि उम्मीद तुझसे भी नहीं करता मैं
बस कर दे मुझे तू मेरे ग़मों से आबाद.,
कर यकीन मेरा
तेरे साथ गर मैं जाऊँगा
ना कोई भी मेरे लिए रोने वाला होगा
ना ही किसी के छूटने का मैं मातम मनाऊंगा.
देखूं ज़रा मैं भी कि कैसी दुनिया है तेरी
प्यार, दोस्ती, इश्क मोहब्बत के नाम पर
क्या तेरी दुनिया में भी
ठगते हैं लोग इन्हीं जज्बातों के नाम पर?
अब बस आ भी जा
बहुत सता लिया है तुने
वर्ना मैं खुद कदम बढ़ा लूँगा तेरी ओर
जो की देर इक पल भी और तुने.
लगा ले मुझको गले
मौत, ज़िन्दगी में आजा मेरी
चल ज़िन्दगी से कहीं दूर चलें.
ले ले ज़िन्दगी मेरी
वो होगी मेरे दोस्ती कि सौगात
खुशियों कि उम्मीद तुझसे भी नहीं करता मैं
बस कर दे मुझे तू मेरे ग़मों से आबाद.,
कर यकीन मेरा
तेरे साथ गर मैं जाऊँगा
ना कोई भी मेरे लिए रोने वाला होगा
ना ही किसी के छूटने का मैं मातम मनाऊंगा.
देखूं ज़रा मैं भी कि कैसी दुनिया है तेरी
प्यार, दोस्ती, इश्क मोहब्बत के नाम पर
क्या तेरी दुनिया में भी
ठगते हैं लोग इन्हीं जज्बातों के नाम पर?
अब बस आ भी जा
बहुत सता लिया है तुने
वर्ना मैं खुद कदम बढ़ा लूँगा तेरी ओर
जो की देर इक पल भी और तुने.
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